वॉइस ऑफ मारवाड़।

पाली।

पूर्व विधायक पाली भीमराज भाटी ने बताया है कि मनी लांड्रिंग रोक कानून 2002 ( PMLA) एक जुलाई 2005 को पारित किया गया था । इस कानून में धारा 2 (y) में घोषित अपराध का विवेचन किया गया है। अगर घोषित अपराध की श्रेणी में कोई अपराध नही किया गया है तो किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही करने का प्रावधान मनी लांड्रिंग रोक कानून की धारा 2 (1) (U) के अंतर्गत नही है , घोषित अपराध कारित होने पर ही एनफोर्समेंट डायरेक्ट(E D) को किसी भी मामले में दखल देने का अधिकार है इस मामले में 31 तरह के घोषित अपराध चिन्हित किये गए है ।
आयकर क़ानून एवं विदेशी विनियम कानून (FEMA)1999 इस कानून के अंतर्गत नही आते है अतः मनी लांड्रिंग रोक कानून के अंतर्गत – काला धन , फर्जी कम्पनी , एवं हवाला लेनदेन नही आते है ।
श्रीमती सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी के विरुद्ध आरोप है कि नेशनल हेराल्ड की मालिक कम्पनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड जिसको 5000 स्वतंत्रता सेनानियों ने शुरू किया था उसको 1057 शेयर होल्डर्स यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड एवं आखिर में एक मालिकाना सन 1937 से सन 2010 के बीच अधिग्रहित किया गया ।
एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड एवं यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड दोनों की समाप्ति खुर्द – बुर्द नही की जा सकती है । अगर इन दोनों कम्पनियों की सम्पति खुर्द- बुर्द की गई है तो भारत सरकार को कानूनन इन कम्पनियों के लाइसेस एवं रजिस्ट्रेशन खारिज करने का अधिकार है और इससे आगे समस्त न्याय संगत कानूनी कार्यवाही करने का अधिकार है ।
वास्तविकता यह है कि न तो पूर्वर्ती यूपीए कांग्रेस सरकार और वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा इस तरह का कोई कदम उठाया गया है इसका स्पष्ट परिणाम यह कि आज दिन तक नेशनल हेराल्ड की या इसकी मूल मालिक एसोसिएट जर्नल्स की सम्पति खुर्द- बुर्द की गई है ।
श्रीमती सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी पर यह आरोप है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में जब नेशनल हेराल्ड ने सन् 2000 से सन् 2008 के मध्य आर्थिक तंगी के चलते अपना प्रकाशन बंद करने का निर्णय लिया तो 90 करोड़ रुपये की मदद कर एसोसिएट जर्नल लिमिटेड की मदद कर उसके लोन को यंग इंडियन प्रा. लिमिटेड को इक्विटी में निवेश दिखा दिया जो एक तरह से सही नही कहा जा सकता, लेकिन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के इस कृत्य को ईडी के अनुसंधान का कोई कानूनी अधिकार नही है क्यूंकि किसी भी लोन को इक्विटी में बदल देने मात्र को घोषित अपराध नही माना जा सकता, यह किसी भी कानून की किताब में नही लिखा है ।
ब्रिटेन के हाउस पर लॉर्ड्स में 1897 में सोलोमन v/s सोलोमन केस में न्यायमूर्ति वेधान विलियम्स ने माना था कि कोई भी रजिस्टर कंपनी अपने शेयर होल्डर्स से अलग अपनी व्यक्तिगत हैसियत रखती है । जबकि श्रीमती सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के बड़े शेयर होल्डर्स 26 फरवरी 2011 में बने थे ,कितो इन दोनों ने कैसे करोड़ो रूपये की हेरा फेरी की तो E D को इन दोनों के खिलाफ जांच करने का अधिकार कैसे प्राप्त हुआ ।
एक आरोप यह है कि श्रीमती सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी ने एक करोड़ रुपये का लोन फर्जी कम्पनी डॉटेक्स मर्चेटड्राइज से 2010 में असोसईएटड़ जर्नल लिमिटेड को दिलवाया जिसका कार्यलय बालीगंज के किसी आकाश अपार्टमेंट के चौथे मंजिल के तीन नम्बर के कमरे में है जो कथित रूप से डॉटेक्स मर्चेडाइज का गेस्ट हाउस है जिसका भुगतान हवाले के माध्यम से करना बताया जा रहा है, जबकि हवाला लेनदेन के विदेशी विनियमन के अपराध की श्रेणी में आता है जो घोषित अपराध की श्रेणी में नही आता , अतः इसका अनुसंधान ED के कार्यक्षेत्र में नही आता है ।
नेशनल हेराल्ड का यह मामला 2012 से धोखाधड़ी, सम्पति हड़पने , आर्थिक अपराधों , षड्यंत्र एवं सार्वजनिक सम्पति अपने निजी हित हेतु उपयोग में लिए जाने, हवाला लेन-देन आदि के आरोपों से चलते लंबित है लेकिन अब गुजरात चुनाव के नजदीक आते ही एवं सन 2024 के लोकसभा चुनाव की आहट के चलते अचानक ED का दुरुपयोग करके श्रीमती सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी को बदनाम करने की नियत से ओर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को डराने के लिए ईडी कार्यलय में पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है और ईडी के अधिकारियों का मनी लांड्रिंग रोक अधिनियम , आयकर कानून एवं विदेशी विनिमयन कानून की आड़ में श्रीमती सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी को गिरफ्तार करने की साजिश की जा रही है और ईडी के अधिकारियों को मजबूर किया जारहा है ,लेकिन ED के साहसी अधिकारी भाजपा के केंद्रीय सरकार की इस सरासर गलत दबाव को हिम्मत के साथ झेल रहे है और श्रीमती सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी को गिरफ्तार करने की हिम्मत नही जुटा पा रहे है ।
ED के अधिकारियों को भान है कि केंद्र सरकार के नाजायज दबाव में हमने कोई नियम विरुद्ध कार्यवाही कर श्रीमती सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी के गिरेबान में हाथ डालने की कुचेष्टा की तो पूरा देश मे हाहाकार मच जायेगा ओर देश की जनता को जवाब देना भारी पड़ जायेगा और श्रीलंका से भी बदतर हालात हमारे देश मे हो जाएंगे, इसलिए केन्द्र सरकार एवं भाजपा के नेता महंगाई, बेरोजगारी , एवं अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर चीनी कब्जे से ध्यान हटाने के लिए सब नाटक कर रहे है ।

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